चौपाल मुंबई की
मुंबई एक ऐसा शहर जहाँ किसी के पास इतनी फुर्सत नहीं है कि पल दो पल अपने लिए भी वक्त निकालें, मगर इसी शहर में कई ऐसे लोग और संगठन हैं जो अपने लिए ही नहीं बल्कि दूसरों के लिए भी वक्त ही नहीं निकालते बल्कि कुछ अलग करना चाहते हैं। मुंबई चौपाल भी एक ऐसा ही संगठन है जिससे जुड़े समर्पित हिंदी प्रेमियों ने हिंदी भाषियों को रचनात्मक उर्जा देने का अनवरत सिलसिला सा शुरु किया है। इस चौपाल में आकर एक आत्मीय सुकून मिलता है। अपने एकांकी नाटकों के माध्यम से देश और दुनिया में कबीर, तुलसी और विवेकानंद जैसे महापुरूषों के चरित्रों को सजीवता से पेश करने वाले शेखर सेन हों, जाने माने पटकथा लेखक अतुल तिवारी या फिर अपना कारोबार छोड़कर हिदी की चिंता करने वाले अशोक बिंदल, सभी पूरे प्रण-प्राण से इस चौपाल को एक सशक्त मंच बनाने में जुटे रहते हैं। यही वजह है कि मुंबई शहर में चौपाल का सिलसिला विगत आठ वर्षों से लगातार चल रहा है। इस संस्था की खासियत यह है कि इसमें कोई पदाधिकारी नहीं है, सभी एक साथ एक ही जगह पर बैठकर आपस में साहित्य, फिल्म, कला और संस्कृति के विविध प्रक्षों पर खुलकर चर्चा करते हैं। यहाँ प्रेंमचंद पर भी बात होती है तो चार्ली चैप्लिन पर भी। पारिवारिक और आत्मीय वातावरण में तीन से चार घंटे कब निकल जाते हैं पता ही नहीं चलता है। यह एक ऐसा मंच है जहाँ नई पीढ़ी के लोग बुज़ुर्गों के साथ बैठकर एक साथ बात करते हैं। चौपाल की खासियत यह है कि यहाँ परदे पर काम करने वाले भी आते हैं तो परदे के पीछे रहकर किसी अभिनेता, अभिनेत्री के किरदार को या किसी गीत को यादगार बना देने वाले वे कलाकार भी जिनके काम का कहीं कोई चर्चा नहीं होता। ऐसी शख्सियतों के जिंदगी के अनुभवों को जब सुनते हैं और उस दृश्य या गीत को याद करते हैं तो उनके सम्मान में श्रध्दा से अपना सिर बरबस ही झुक जाता है।
January 13, 2007 at 13:12 p01
ऐसी शख्सियतों के जिंदगी के अनुभवों को जब सुनते हैं और उस दृश्य या गीत को याद करते हैं तो उनके सम्मान में श्रध्दा से अपना सिर बरबस ही झुक जाता है।
ऐसे अनुभय यहाँ लिखते रहें तो हम भी लाभाव्वित होंगे…
नए चिट्ठे की बधाई, व नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं
January 13, 2007 at 13:12 p01
i m coming to Mumbai to pursue a carrier in Film Direction in mid feb…so i m looking forward of joining this…u can guide me on my mail…
Wish u all Luck for this venture…
January 13, 2007 at 13:12 p01
हिन्दी ब्लॉग जगत् में आपका हार्दिक स्वागत् है। उम्मीद है आपका लेखन नियमित तौर पर पढ़ने को मिलता रहेगा।
January 13, 2007 at 13:12 p01
चूँकि आपकी यह पहली पोस्ट है इसलिए,सबसे पहले बधाई और बाद एक अनुरोध कि नियमित रहिएगा।
धन्यवाद।
January 13, 2007 at 13:12 p01
नीलिमा जी,
हिन्दी चिट्ठाकारों के परिवार मे आपका हार्दिक स्वागत है। हिन्दी की मशाल जलाए रखिए, माना की रास्ता लम्बा है, लेकिन सफ़लता जरुर मिलेगी। किसी भी प्रकार की सहायता के लिए हम सिर्फ़ एक इमेल की दूरी पर है।
आपका ब्लॉग नारद पर जोड़ दिया गया है। उम्मीद है आपके आगे आने से, आपके अन्य साथियों को भी हिन्दी में चिट्ठा लिखने का प्रोत्साहन मिलेगा।
January 13, 2007 at 13:12 p01
नीलिमा जी आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में अभिनन्दन है।
मुम्बई चौपाल अर उसकी गतिविधियों के बारे में जानकर बहुत खुशी हुई। आपके माध्यम से मुम्बै से बाहर रहने वाले लोग भी अब मुम्बई चौपाल से जुड़ गये हैं। दूसरी ओर हम चिट्ठाकारों की बात और सोच भी आपके माध्यम से मुम्बई चौपाल तक पहुँचती रहेगी।
January 13, 2007 at 13:12 p01
Mumbai Chaupal ki gatividhiyon ke bare mein jaankar achcha laga. Asha hai aage bhi isse judi baton se aap humein avgat karate rahenge.
January 13, 2007 at 13:12 p01
हिन्दी चिट्ठे जगत में स्वागत है।
January 13, 2007 at 13:12 p01
आपका स्वागत है।
January 13, 2007 at 13:12 p01
चौपाल मुम्बई की, हिन्दी का ४००वां (400th) ब्लॉग है। सभी को बधाई।
January 13, 2007 at 13:12 p01
आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में हार्दिक स्वागत. निरंतर लेखन के लिये शुभकामनायें.
January 13, 2007 at 13:12 p01
आपका स्वागत है!
January 14, 2007 at 13:12 p01
हिन्दी चिट्ठाजगत में स्वागत है।प्रविष्टि डालते वक्त Post Slug में अंग्रेजी में एक-दो संकेत-शब्द डाला करें जिनके बीच में , (अर्धविराम चिह्न) हो।इसका लाभ यह होगा कि http://chaupali.wordpress.com/2007/01/13/%e0%a4%9a%e0%a5%8c%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%88-%e0%a4%95%e0%a5%80/ जैसे बडे पते के बजाय आपकी प्रविष्टियों का छोटा पता होगा और उसे हिन्दी के अग्रीगेटर्स में आसानी से जगह मिलेगी।ऐसे लम्बे पतों को पढ़ने में यन्त्र को भी दिक्कत हो सकती है। बडी संख्या में पाठक ऐसी सूचियों की मदद से ही पहुँचते हैं , जो अद्यतन प्रविष्टियों की लगातार सूची जारी करते हैं ।
किसी भी कठिनाई के बारे में ‘चिट्ठाकार’ समूह की शरण में बेझिझक जाँए,जहाँ कोई विशेषज्ञ साथी समाधान का प्रयास करेंगे।
January 15, 2007 at 13:12 p01
नीलिमा जी, स्वागत है। ऊपर वाली ही बात दोहराऊँगा कि नियमित लिखती रहें। कुछ ही दिन में सब आप से घुल-मिल जाएंगे।
January 16, 2007 at 13:12 p01
स्वागत हमारी तरफ़ से भी!
January 19, 2007 at 13:12 p01
स्वागत है आपका चिट्ठा जगत में, विशेष रूप से आपके आने से 400 का आँकड़ा पूरा हो गया है।
March 19, 2007 at 13:12 p03
I was extremely happy and felt connected with your Chaupal of March 2007. With both creative and sensitive people around sensitising themselves and else, I felt like home coming. A sense of belonging has already been established. I wish and I am willing to contribute to the continuing existence and growth of Chaupal.
Yours sincerely,
Krishnan